बातें 'हक़' की

 अगर आप किसी व्यक्ति का हक़ छीन रहे हैं जो उसके काम के बदले उसे प्राप्त होनी चाहिए थी तो आप उसके साथ सबसे बड़ी नाइंसाफी कर रहे हैं, जिस दिन से आप ऐसा करने से परहेज़ कर लेंगे उस दिन से उस व्यक्ति के साथ -साथ आपकी उन्नति के मार्ग सदा के लिए खुलते जायेंगे।

हां ऐसा जरूर हो सकता है कि जो आपने कार्य किया उसका फल देर से प्राप्त हो लेकिन होता जरूर है,

ऐसा माना जाता है कि ' जो हम दुनियां को देते हैं,वो एक दिन हमारे पास लौट कर जरूर आता है' तो आप वही दूसरों को दें जो आप ख़ुद पाना चाहते हों, वो नही जो आप कभी स्वीकार्य न करना चाहते हों,

मुझे पता है आप ये कभी नहीं चाहते कि आपका हक़ कोई और आपसे छिने,तो शुरूआत आपसे हो तो बेहतर होगा !         

               विजय तलवार..

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